Monday, 16 March 2020

राज्यपाल के दूसरे आदेश के बाद भी सरकार ने कोई अधिसूचना जारी नहीं की, कमलनाथ विशेषज्ञों से कानूनी सलाह ले रहे

भोपाल. मध्य प्रदेश में सत्ता के लिए शुरू हुआ संघर्ष अब कानूनी दांव-पेंच में उलझ गया है। सोमवार को राज्यपाल के आदेश के बावजूद स्पीकर के फ्लोर टेस्ट नहीं कराए जाने के खिलाफ भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर आज सुनवाई हो रही है। उधर, राज्यपाल ने फिर सोमवार शाम को सरकार को पत्र लिखकर फ्लोर टेस्ट कराने का पत्र कमलनाथ को लिखा था। हालांकि, सरकार की ओर से इस पत्र को लेकर अभी तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई।

वहीं, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्यपाल को पत्र लिखकर उनके आदेश की वैधता को ही चुनौती दे दी है। कमलनाथ ने 14 मार्च को राज्यपाल द्वारा लिखे पत्र का जिक्र करते हुए कहा, 'पत्र में आपने यह मान लिया है कि मेरी सरकार बहुमत खो चुकी है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि आपने भाजपा से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर ऐसा माना है।' दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं। मुख्यमंत्री देर रात से अब तक लगातार कानूनी पहलुओं पर विशेषज्ञों से बात कर रहे हैं।

सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री ने कानूनी विशेषज्ञों से मध्यप्रदेश के ताजा हालात से जुड़े केसों के बारे में जानने की कोशिश की। वे विधानसभा से संबंधित सभी नियमों को बारीकी से समझ रहे हैं। मंगलवार सुबह से सीएम हाउस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

अपडेट्स

  • 11.00 AM: मंत्री विजय लक्ष्मी साधौ सीएम हाउस से निकलीं।
  • 10.37 AM: ब्लैक ग्लास की एसयूवी से 4 कांग्रेस विधायक सीएम हाउस पहुंचे।
  • 9.55 AM: करीब 12 खाली एसयूवी गाड़ियां सीएम हाउस के अंदर गईं।
  • शोभा ओझा ने सुबह मुख्यमंत्री से मुलाकात की। यहीं से वे महिला आयोग की अध्यक्ष का पदभार संभालने ऑफिस पहुंचीं।

अब आगे क्या हो सकता है?
1) सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
फ्लोर टेस्ट में देरी के विरोध में भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। सुनवाई चल रही है। अगर स्पीकर अगले 10 दिन के भीतर बागी विधायकों को अयोग्य करार देते हैं तो भी मामला हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है। कोर्ट में तुरंत सुनवाई हुई तो 26 मार्च से पहले भी फ्लोर टेस्ट हो सकता है।

एक्सपर्ट व्यू : संवैधानिक मामलों के जानकार फैजान मुस्तफा के मुताबिक, स्पीकर के पास दो विकल्प हैं। या तो वे विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर लें या उन्हें डिस्क्वालिफाई (अयोग्य) करार दें। स्पीकर अपने फैसले को डिले कर सकते हैं, ताकि सत्ताधारी पार्टी के लोगों को बागियों को मनाने का कुछ वक्त मिल जाए। लेकिन दो विकल्पों के अलावा स्पीकर के पास कोई और चारा नहीं है।

2) क्या राष्ट्रपति शासन लगने के आसार हैं?
ये भी एक संभावना है। इसके उदाहरण भी हैं। पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में महाराष्ट्र में चुनाव नतीजों के 19 दिन बाद राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। तब राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य के तीन प्रमुख दलों भाजपा, शिवसेना और राकांपा को सरकार बनाने का न्योता दिया था, लेकिन कोई भी दल सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या बल नहीं जुटा पाया। 12 दिन बाद रातों-रात राष्ट्रपति शासन हटा और देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। इससे भी पहले जून 2018 में जम्मू-कश्मीर में जब भाजपा ने महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया तो पीडीपी-नेशनल कॉन्फ्रेंस ने मिलकर सरकार बनाने की कोशिश की। हालांकि, इसी बीच वहां राज्यपाल शासन लगा दिया गया।

एक्सपर्ट व्यू : फैजान मुस्तफा बताते हैं कि सरकार या स्पीकर जानबूझकर फ्लोर टेस्ट नहीं कराते तो प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता का कारण बताकर राज्यपाल सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर आज सुनवाई होगी।
मुख्यमंत्री निवास के बाहर मंगलवार सुबह से किसी तरह की हलचल नहीं देखी गई।
Kamal Nath MP Floor Test Result 2020 Live | Kamal Nath Madhya Pradesh Government Trust Vote Today Latest Results Live News Updates, BJP Shivraj Singh Chouhan Congress MLA News
Kamal Nath MP Floor Test Result 2020 Live | Kamal Nath Madhya Pradesh Government Trust Vote Today Latest Results Live News Updates, BJP Shivraj Singh Chouhan Congress MLA News


source https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/kamal-nath-mp-floor-test-result-2020-live-madhya-pradesh-government-trust-vote-today-latest-bjp-shivraj-singh-chouhan-congress-mla-news-126993267.html

No comments:

Post a Comment